बस्तर में चलाया जा रहा नक्सल अभियान पूरे देश में चर्चा में है। पुलिस और पैरा मिलिट्री फोर्स एक तरह से नक्सलियों के सफाये की ओर बढ़ रही है। लाल आतंक का अंत करने जिस तरह की दुर्गम पहाड़ियों में जिस तरह प्लानिंग से ऑपरेशन चलाया जा रहा है उसे देश में मॉडल के तौर पर पेश किया जा सकता है। माना जा रहा है कि इसी वजह से डीजीपी-आईजी कांफ्रेंस का आयोजन इस बार छत्तीसगढ़ में कराने की तैयारी है। कांफ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के अलावा देश के सभी राज्यों के डीजीपी और आईजी रैंक के अफसर शामिल होंगे। आयोजन की तैयारी शुरू कर दी गई है। कांफ्रेंस में नक्सल अभियान के अलावा आतंरिक सुरक्षा और बढ़ते साइबर क्राइम पर चर्चा के साथ उन्हें रोकने और मॉनीटरिंग के विकल्पों पर चर्चा की जाएगी। डीजीपी-आईजी कांफ्रेंस का आयोजन और उसका एक-एक शेड्यूल आईबी के माध्यम से तय होता है। छत्तीसगढ़ पुलिस उन्हीं के निर्देश पर पूरा शेड्यूल तय करेगी। कांफ्रेंस का आयोजन चूंकि नवा रायपुर में होगा, इसलिए देश के सभी राज्यों से आने वाले डीजीपी और आईजी रैंक के अफसरों को नवा रायपुर में ही ठहराया जाएगा। उनके साथ आने वाले स्टाफ और सुरक्षा कर्मियों के लिए नवा रायपुर में सरकारी खाली फ्लैट चेक करवाए जा रहे हैं। आमतौर पर हर साल किसी न किसी राज्य में होने वाला ये ये आयोजन तीन दिवसीय होगा। कांफ्रेंस के एक दिन पहले लगभग सभी आमंत्रित अफसर पहुंचेंगे और संपन्न होने के अगले दिन लौटेंगे। उसी हिसाब से ठहरने और बाकी इंतजाम किए जा रहे हैं। बता दें कि पिछली कांफ्रेंस केन्द्रीय गृहमंत्री ने राज्यों के समन्वय पर जोर दिया था। 2014 के बाद दिल्ली के बाहर हो रही कांफ्रेंस
2014 के पहले तक इस कांफ्रेंस का आयोजन दिल्ली में ही होता था। नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद कांफ्रेंस का आयोजन दिल्ली से बाहर आयोजित कराने का निर्णय लिया। उसके बाद से अब अलग-अलग राज्यों में इसका आयोजन होता रहा है। सबसे पहले असम की राजधानी दिसपुर में कांफ्रेंस हुई। उसके बाद गुजरात के कच्छ फिर 2016 में हैदराबाद में आयोजित किया गया। 2017 में डीजीपी-आईजी कांफ्रेंस उत्तराखंड के टनकपुर में आयोजित की गई। उसके बाद फिर गुजरात काे मौका मिला और आयोजन गुजरात के केवाडिया में हुआ। 2019 में महाराष्ट्र के पूणे, 2020 में कोविड-19 के चलते वर्चुअली कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। वर्ष 2021 में डीजी-आईजी कॉन्फ्रेंस उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित की गई थी। साइबर अपराध को लेकर बढ़ रहा है फोकस
देशभर में जिस तरह से साइबर अपराध बढ़ रहे हैं उसे देखते हुए डीजीपी-आईजी कांफ्रेंस में इस पर फोकस बढ़ रहा है। पिछली कांफ्रेंस में साइबर अपराध, पुलिस व्यवस्था में प्रौद्योगिकी, आतंकवाद विरोधी चुनौतियां, वामपंथी उग्रवाद, जेल सुधार और आंतरिक सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा की गई। इसके साथ ही नए आपराधिक कानूनों के कार्यान्वयन के लिए रोड मैप पर विचार-विमर्श किया गयास। पुलिस व्यवस्था और सुरक्षा में भविष्य के विषयों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डीपफेक जैसी नई चुनौतियों और उनसे निपटने के तरीकों पर भी चर्चा की गई।
क्या है उद्देश्य : डीजीपी-आईजी कांफ्रेंस में वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों की पहचान कर उससे निपटने के उपायों पर चर्चा की जाती है। साथ ही संगीन अपराधों की निगरानी के लिए भी विचार विमर्श किया जाता है। कांफ्रेंस में सामने आने वाली चुनौतियों और निष्कर्ष को हर साल प्रधानमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है।
तैयारी:पीएम मोदी, गृहमंत्री शाह आ सकते हैं प्रदेश में होने वाले आयोजन में

















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