75 दिनों तक चलने वाले प्रसिद्ध बस्तर दशहरा की सबसे अनूठी जोगी बिठाई रस्म पूरी हो गई है। जगदलपुर के सिरहासार भवन में मंगलवार (23 सितंबर) को इस रस्म को अदा किया गया। बड़े आमाबाल के जोगी परिवार के युवक रघुनाथ नाग ने इस रस्म को अदा कर करीब 617 साल पुरानी परंपरा निभाई है। वहीं आज शाम से फूल रथ की परिक्रमा भी शुरू की जाएगी। दरअसल, सिरहासार भवन में बनाए गए कुंड में बैठकर जोगी परिवार दशहरा तक निर्जला व्रत रखकर देवी की आराधना करेगा, ताकि बिना किसी बाधा के बस्तर दशहरा मनाया जा सके। बड़े आमाबाल के रहने वाले रघुनाथ नाग पिछले कुछ सालों से जोगी बिठाई की रस्म निभा रहे है। सिरहासार भवन में दंतेश्वरी माई और अन्य देवी-देवताओं का आशीर्वाद लेकर निर्जला व्रत रखकर तपस्या शुरू कर दी गई है। केवल पुरुष ही निभाते हैं विधान बस्तर दशहरा की जोगी बिठाई रस्म को केवल पुरुष ही निभाते हैं। मांझी, चालकी और पुजारी की मौजूदगी में जोगी को नए वस्त्र पहनाए गए। इसके बाद उसे गाजे-बाजे के साथ कपड़ों के पर्दे की आड़ में सिरहासार भवन के पास स्थित मावली माता मंदिर ले जाया गया। फिर वहां रखे पारंपरिक तलवार की पूजा की गई। फिर वही तलवार लेकर जोगी को दिया गया है। इस तलवार को लेकर जोगी वापस सिरहासार भवन में पहुंचे। पुजारी के प्रार्थना के बाद उपवास कर संकल्प लेकर एक कुंड में बैठ गए। जोगी ने कहा कि, इस साल बस्तर दशहरा बिना किसी बाधा के संपन्न होगा। जोगी बिठाई की यह है मान्यता मान्यताओं के अनुसार, जोगी के तप से देवी प्रसन्न होती हैं। सालों से दशहरा विधान में जोगी विजयादशमी तक साधना में लीन रहता है। ऐसी मान्यता है कि इनकी साधना से दशहरा मनाने और रथ की परिक्रमा में कोई बाधा नहीं आती है। आज से फूल रथ की परिक्रमा शुरू आज से 4 चक्कों वाले फूल रथ की परिक्रमा भी शुरू की जा रही है। बेड़ाउमड़ और झाड़उमड़ गांव के ग्रामीणों ने रथ का निर्माण किया है। वहीं किलेपाल इलाके के ग्रामीण रथ को खींचेंगे। रथ पर देवी दंतेश्वरी के छत्र को विराजित किया जाएगा। फिर सिरहासार भवन से गोलबाजार चौक होते हुए मां दंतेश्वरी मंदिर तक रथ को लाएंगे।
बस्तर दशहरा की जोगी बिठाई रस्म पूरी:निर्जला व्रत रखकर कुंड में बैठे रघुनाथ नाग, करेंगे देवी की आराधना, आज से फूल रथ की परिक्रमा शुरू

















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