बारिश से आफत:17 साल से मरम्मत नहीं, 2 दिन से रिसाव लुत्ती बांध ढहा; 4 की मौत, तीन लापता

बलरामपुर जिले के धनेशपुर गांव में भारी बारिश के चलते 43 साल पुराना 74 हेक्टेयर में फैला लुत्ती (सतबहिनी) बांध मंगलवार रात ढह गया। बांध टूटने से उसके तेज बहाव में निचले इलाके में बसे 4 घर चपेट में आ गए। घरों में सो रहे चार परिवारों के सात सदस्य में पानी में बह गए। इस दौरान बतशिया (61) पति रामवृक्ष और चिंता (35) पति सजिवन, रजंती (28) पति गणेश खैरवार और उसकी छह साल की बेटी प्रिया की मौत हो गई। वहीं, रजंती के दोनों बेटे कार्तिक और छोटा बेटा और बुजुर्ग जितन खैरवार (65) लापता हैं। पुलिस और एनडीआरएफ की टीम उनकी तलाश कर रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि बांध का 17 साल से मरम्मत नहीं हुआ था। घटना से 2 दिन
पहले बांध से पानी का रिसाव हो रहा था, पर विभाग लापरवाह बना रहा। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बारिश के दबाव से बांध ओवरफ्लो हो गया और टूट गया। वहीं, प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है। बता दें कि लुत्ती बांध को 1982 में मिट्टी से बनाया गया था। इसकी जल संग्रहण क्षमता 0.44 एमसीएम यानी करीब 440 लाख लीटर है। सरगुजा संभाग में औसत से 58% अधिक बारिश हुई है। इसमें बलरामपुर जिला सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। इससे जलाशय और बांध लबालब भर गए हैं। 43 साल पुराना यह बांध 74 हेक्टेयर में फैला, इसी से 420 एकड़ की सिंचाई 60 मवेशी बहे, 200 एकड़ फसल प्रभावित: पानी के तेज बहाव में 55 बकरी, 5 गाय और 4 बैल बह गए है। वहीं, 200 एकड़ में लगी धान और टमाटर की फसल बर्बाद हो गई। इस बांध से करीब 420 एकड़ में सिंचाई की जाती थी। प्रपोजल भेजा, पर नहीं मिली मरम्मत की मंजूरी
साल 2020-21 में मरम्मत के लिए प्रपोजल भेजा गया था, लेकिन शासन से मरम्मत की स्वीकृति नहीं मिली। रामानुजगंज के ईई एनपी डहरिया ने कहा कि भारी बारिश से बांध ओवर फ्लो होकर टूट गया। बांध में रिसाव नहीं था। इसकी रायपुर की टीम जांच करेगी। लुत्ती बांध की आखिरी मरम्मत 2007-08 में नरेगा के तहत कराई गई थी। इसके बाद बड़ी मरम्मत नहीं हुई। उत्तर भारत बारिश से बेहाल: यमुना खतरे के निशान से दो मीटर ऊपर, 15 हजार शिविरों में लगातार भारी बारिश से उत्तर भारत के कई राज्यों में हालात बिगड़े हुए हैं। पंजाब 1988 के बाद 37 साल की सबसे भीषण बाढ़ झेल रहा है। अब तक 37 लोगों की जान जा चुकी है। 3.5 लाख से अधिक लोग संकट में हैं। 20 हजार लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान गुरुवार को राज्य का दौरा करेंगे। पंजाब, हिमाचल और चंडीगढ़ में सभी शैक्षणिक संस्थान 7 सितंबर तक बंद कर दिए गए हैं। दिल्ली में यमुना खतरे के निशान से दो मीटर ऊपर बह रही है। खतरे का निशान 205.33 है, जबकि बुधवार शाम यमुना का जलस्तर 207.43 मीटर था। 1963 के बाद पांचवीं बार यमुना का जलस्तर 207 मीटर से ऊपर गया है। 2023 में यह 208.66 मीटर तक पहुंचा था। यमुना के साथ लगते इलाकों के घरों और दुकानों में पानी भरने के चलते करीब 15 हजार लोग राहत शिविरों में पहुंचाए गए। यमुना बाजार में बाढ़ प्रभावितों के लिए बने शिविरों तक भी पानी पहुंच गया। सबसे व्यस्त निगम बोध श्मशान घाट में देर शाम पानी भरने के चलते अंतिम संस्कार रोकने पड़े। हिमाचल में भी हालात बदतर हैं। वहीं, छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में एक छोटा बांध टूटने से अचानक बाढ़ आ गई। घटना में 4 लोगों की मौत हो गई। 3 अन्य लापता हैं। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार बुधवार को देश में 21 जगह नदियां ‘गंभीर बाढ़’ की स्थिति में थीं। 33 जगह जलस्तर सामान्य से ऊपर था।

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