रायपुर में भव्य तिरंगा यात्रा: एकता, सुरक्षा और विकास का संदेश रायपुर में बुधवार को तिरंगा यात्रा का आयोजन किया गया। इस माैके पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि तिरंगा यात्रा केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति का महान अनुष्ठान है, जो भारत की एकता, अखंडता और संप्रभुता का प्रतीक है। स्वतंत्रता संग्राम के वीरों को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब हर घर तिरंगा फहराएगा और भारत आर्थिक एवं सांस्कृतिक रूप से और अधिक सशक्त बनेगा। प्रदेश की राजधानी रायपुर में गणतंत्र दिवस पर होने वाली मुख्य परेड के आयोजन स्थल में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अगले साल से नई दिल्ली के राजपथ की तर्ज पर नवा रायपुर के एकात्म पथ में गणतंत्र दिवस की परेड आयोजित की जाएगी। इसके बाद स्वतंत्रता दिवस की परेड भी वहीं होगी। राज्य सरकार ने इस बारे में तैयारी कर ली है। इससे पहले जब डॉ. रमन सिंह मुख्यमंत्री थे, तब महापुरुषों के नाम पर नवा रायपुर के चौक चौराहों का नामकरण करने के साथ ही राष्ट्रीय पर्व मनाने की तैयारी की गई थी, लेकिन सरकार बदल गई थी। इसके बाद दोबारा सत्ता में भाजपा आई तो अब इस पर सहमति बन गई है। दरअसल, राज्य सरकार नवा रायपुर की रौनक बढ़ाने के लिए प्रयास कर रही है। यही वजह है कि मुख्यमंत्री समेत सभी मंत्री वहां के बंगले में शिफ्ट हो गए हैं। नया विधानसभा भवन भी बनकर तैयार होने जा रहा है। दिसंबर में होने वाला शीतकालीन सत्र वहीं कराने की तैयारी है। राजभवन भी लगभग कंप्लीट होने की स्थिति में है और राज्यपाल भी जल्द ही शिफ्ट होंगे। इस वजह से नवा रायपुर में ही राष्ट्रीय पर्वों के आयोजन की प्लानिंग की जा रही है। इतिहासकार रमेंद्रनाथ मिश्र के मुताबिक अंग्रेजों के जमाने में 1857 में सैनिक क्रांति के दौरान वर्तमान पुलिस परेड ग्राउंड फौजी छावनी था। देश आजाद हुआ तो पहली बार 15 अगस्त 1947 को गांधी मैदान पर वरिष्ठ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वामनराव लाखे ने ध्वजारोहण किया। 1948 में उनकी मृत्यु के बाद उनकी यादें चिरस्थायी बनाने के लिए लाखे चौक बनाया गया। एक का नामकरण भी उनके नाम पर किया गया। 1947 से 1956 तक मध्यप्रदेश सीपी एंड बरार था। 1 नवंबर 1956 को मध्यप्रदेश मध्य भारत व विंध्य प्रदेश को मिलाकर बना। राजधानी नागपुर में थी। इसके बाद भोपाल राजधानी बनने पर रायपुर में भी पुलिस परेड मैदान यानी फौजी छावनी में राष्ट्रीय पर्व मनाए जाने लगे। पहले इसका स्वरूप छोटा था फिर विशाल रूप लेने लगा। 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ बनने के बाद इसकी विशालता, मनोरमता देखते ही बनती है। गोल चौक से मुख्य मार्ग तक होगी परेड बताया गया है कि नवा रायपुर के एकात्म पथ पर बने दीनदयाल उपाध्याय गोल चौक से नवा रायपुर की मुख्य सड़क के बीच परेड का आयोजन कराने पर विचार किया जा रहा है। कुछ लोगों ने नवा रायपुर के राज्योत्सव स्थल पर राष्ट्रीय पर्व मनाने का सुझाव दिया है।
छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय पर्व के आयोजन स्थल में अगले साल-बदलाव:नवा रायपुर के एकात्म पथ पर राजपथ की तर्ज पर होगी गणतंत्र दिवस की परेड

















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