छत्तीसगढ़ में बाघों की संख्या बढ़ाने की योजना को झटका:मध्यप्रदेश का बाघिन देने से इनकार, कहा- बाड़ा बनाओ, वहीं से वंश बढ़ाओ

छत्तीसगढ़ में बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में मध्यप्रदेश से 2 बाघिन लाने की योजना बनाई है। सुरक्षा के प्रबंध भी हो चुके हैं, लेकिन अब इस प्रयास में नई चुनौती सामने आई है। मध्यप्रदेश वाइल्ड लाइफ ने बाघिन देने से पहले कुछ शर्तें रख दी हैं। इसके मुताबिक, पहले 75-100 वर्ग किमी एरिया में बाड़ा बनाया जाए। इसके बाद ही बाघिन भेजी जाएंगी। आगे भी बाघिन यहीं रहकर शावकों को जन्म देंगी। शावक जब बड़े होंगे, तब उन्हें जंगल में छोड़ा जाएगा। इधर, कान्हा किसली नेशनल पार्क ने तो मादा बाघ देने से साफ इनकार कर दिया है। उनका तर्क है कि वहां बाघिनों की संख्या पहले ही कम है। ऐसे में उन्हें शिफ्ट करना संभव नहीं होगा। वे फिलहाल केवल नर बाघ ही दे सकते हैं। हालांकि, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व केवल बाघिनों को लाने पर जोर दे रहा है। इधर, उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व के अफसरों की मानें तो मध्यप्रदेश वाइल्ड लाइफ की शर्तों को मानते हुए बाड़ा बनाएं तो इस पर करीब 20 करोड़ खर्च होंगे। निर्माण के दौरान वाइल्ड लाइफ भी प्रभावित होगा। इलाके की दुर्गम पहाड़ियां भी बाड़ा बनाने में चुनौतीपूर्ण साबित होंगी। ऐसे में अब बाघिनों को रेडियो कॉलर लगाकर सीधे जंगल में छोड़ने का विचार है।
इसे हार्ड रिलीज कहते हैं। जरूरत पड़ी, तो महज 5-10 हेक्टेयर का बाड़ा बनाया जा सकता है। इसमें 10-20 लाख रुपए का खर्च आएगा। छत्तीसगढ़ को 2 बाघिन देने मध्यप्रदेश ने रखी यह शर्तें… छत्तीसगढ़ में तीन साल में दोगुने हुए बाघ
प्रदेश में बाघों की कुनबा बढ़ रहा है। पिछले 3 साल में बाघों की संख्या दोगुनी हो गई है। साल 2022 में हुई गणना के अनुसार यहां 17 बाघ थे, जिनकी संख्या आज की स्थिति में करीब 35 है। इसमें सर्वाधिक 18 बाघ अचानकमार टाइगर रिजर्व में ट्रेस किए गए है, जबकि गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व में 7 बाघ देखे गए है। छत्तीसगढ़ में बाघों की संख्या बढ़ाने के प्रयासों पर फिलहाल संशय हैं। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) द्वारा उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के लिए 2 मादा बाघिन और 1 नर बाघ को शिफ्ट करने के लिए अनुमति मार्च 2025 में ही दी जा चुकी थी।

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