सबसे बड़ा सरेंडर:सरगना रूपेश समेत 210 नक्सलियों का बंदूकों को अलविदा संविधान थामा… पूर्वी-उत्तर इलाके में नहीं बचा कोई बड़ा लीडर

नक्सल हिंसा से जूझ रहे बस्तर के लिए शुक्रवार का दिन ऐतिहासिक रहा। उस क्षेत्र में सक्रिय 210 नक्सलियों ने जगदलपुर की पुलिस लाइन में सरेंडर कर दिया। सरेंडर करने वालों में अबूझमाड़ से चर्चित नक्सली लीडर-प्रवक्ता रूपेश और कांकेर में सक्रिय लीडर राजू के साथ कई महिला-पुरुष नक्सली भी हैं। इन्हें बसों में भरकर लाया गया। नक्सली उन्मूलन के लिए ऑपरेशन तेज होने के बाद यह अब तक की सबसे बड़ा सरेंडर है। इस वापसी को ‘पूना मारगेम’ यानी नई राह नाम दिया गया। बस्तर आईजी पी. सुंदरराज ने बताया कि पहली बार 153 हथियार फोर्स को सौंपे गए हैं। अब तक दो हजार से ज्यादा नक्सली सरेंडर कर चुके हैं। इससे स्पष्ट है कि बस्तर से नक्सलवाद सफाए की ओर बढ़ रहा है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार फिलहाल पूर्वी-उत्तर बस्तर में कोई बड़ा नक्सली लीडर सक्रिय नहीं दिख रहा है। छोटे कैडर भी लगभग खत्म हो चुके हैं। बीजापुर और सुकमा में कुछ नक्सल मूवमेंट जरूर है, जो लगातार अपना ठिकाना बदल रहे हैं। लेकिन वहां भी पोलित ब्यूरो या सेंट्रल कमेटी के किसी सदस्य की मौजूदगी की जानकारी नहीं है। बड़े लीडरों में केवल देवा, हिड़मा समेत कुछ गिनती के ही नक्सली बचे हैं, जो पुलिस के रिकॉर्ड में दर्ज हैं। लेकिन वे भी राज्य से भाग गए हैं। पुलिस सरेंडर कर चुके नक्सलियों से जानकारी लेकर गांवों में जाकर जांचेगी कि कहीं संगठन में नया सरगमा तो नहीं उभर रहा। साथ ही यह भी पता लगाएंगे कि क्या दूसरे राज्यों से कोई नक्सली यहां आकर संगठन संभालने की कोशिश तो नहीं कर रहा है। 19 एके-47, 17 SLR समेत 153 हथियार सौंपे : आत्मसमर्पण करने वाले 208 नक्सली अपने साथ कुल 153 हथियार लेकर आए इनमें एके-47-19 नग,एसएलआर- 17 नग, इंसास 23 नग, 303 रायफल- 36 नग, कार्बाइन- 4 नग, बीजीएल लांचर-11 नग, 12 बोर और सिंगल शॉर्ट 41 नग और पिस्टल 1 नग लेकर आए। सरेंडर करने वाले 208 में 110 महिला और 98 पुरूष शामिल थे। एक दिन पहले ही शाह का ऐलान
इतने बड़े पैमाने पर आत्मसमर्पण की सूचना मिलने पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 16 अक्टूबर को ही ऐलान कर दिया था कि अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर क्षेत्र से लाल आतंक का सफाया हो गया है। उल्लेखनीय है कि शाह ने मार्च 2026 तक पूरे देश से नक्सलवाद के खात्मे की समय सीमा तय की है। 6 करोड़ संगठन में छोड़ आए सरेंडर कर चुके नक्सल लीडर रूपेश उर्फ सतीश का एक वीडियो सामने आया है। जिसमें वे दावा करते दिख रहे हैं कि नक्सल हथियारों के दम पर अपना संघर्ष कायम रखने के पक्ष में सहमति नहीं बनी। हमारी राय है कि जनता के साथ मिलकर काम करना चाहिए, बजाय भूमिगत रहकर काम करने के। हम चुनाव में भागीदारी करना चाहते हैं। रूपेश यह भी कहते दिखे कि सोनू दादा उर्फ भूपति ने 6 करोड़ गनमैन अमित के माध्यम से कमेटी को सौंपे थे। वह पैसा भी हमने संगठन के सदस्यों को सौंप दिए हैं। हम केवल ह​​थियार लेकर सरेंडर करने जा रहे हैं। वह यह भी कहता दिखा कामरेडों ने इस बात की समीक्षा की कि सशस्त्र संघर्ष में हमने कहां गलती की। वैसे हम हम शर्तों के साथ समर्पण कर रहे हैं। जहां तक यह फैसला और पहले करने का सवाल है, तो हमसे गलती हुई है। हमें फरवरी में ही यह कदम उठाने चाहिए थे। डराने वाले लोकतंत्र के सामने नतमस्तक
सीएम विष्णुदेव साय ने कहा कि जो नक्सली बंदूक से जनता को डराते थे, वो आज हथियार डालकर लोकतंत्र के सामने नतमस्तक हैं। पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ मार्च 2026 तक नक्सलवाद के खात्मे की ओर तेजी से अग्रसर है। नक्सलियों का पुनर्वास बिना शर्त: शर्मा
गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सलियों का पुनर्वास बिना शर्त के हुआ है। जेल में बंद नक्सली गुनाह कबूल कर मुख्यधारा में आना चाहते हैं, तो हम मदद करेंगे।

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