छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में हल्की बारिश के बीच एक बार फिर हिरणों का झुंड नजर आया। हिरण का परिवार जंगल से निकलकर सड़क किनारे पहुंचा था। जिसे राहगीरों ने कैमरे में कैद किया। यह नजारा बालोद-दल्लीराजहरा मुख्य मार्ग पर भैंसबोड़ मोड़ के पास का है। कोहंगाटोला के रहने वाले मनीष साहू अपने परिवार के साथ कार से दल्लीराजहरा जा रहे थे तभी उन्होंने यह वीडियो बनाया। बता दें कि इन प्राणियों की सुरक्षा के लिए तांदुला जलाशय के जंगलों में इंसानी दखल पर रोक है। वन विभाग की टीम इस पर नजर रखती है। सड़क किनारे दिख जाते हैं वन्यजीव बालोद से दल्लीराजहरा रोजाना ड्यूटी पर आने-जाने वाले जय जायसवाल बताते हैं कि गोंदली केनाल के बाद से प्रकृति का अद्भुत नजारा शुरू हो जाता है। इस रास्ते में अक्सर हिरण, मोर, खरगोश, नीलगाय, जंगली सुअर, लकड़बग्घा, सियार और भालू जैसे कई वन्यजीव सड़क किनारे तक आ जाते हैं। इन्हें देखने के लिए राहगीर ठहर जाते हैं। संवेदनशील प्राणी, इसलिए इंसानी दखल पर रोक वन विभाग ने तांदुला और गोंदली जलाशय के जंगलों में मानवीय हस्तक्षेप पर पूरी तरह रोक लगा रखा है। यहां तक कि बाइक और कार ले जाना भी प्रतिबंधित है। वजह यह है कि हिरण, मोर और खरगोश जैसे जीव बेहद संवेदनशील माने जाते हैं। बालोद के जंगल वन्यजीवों के लिए अनुकूल तांदुला से गोंदली जलाशय तक का जंगल कई प्रजातियों के जीवों का घर है। यहां अजगर और कोबरा जैसे सांपों के साथ हिरण और मोर बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। भोलापठार, नारागांव, रानीमाई से लेकर कल्लुबाहरा और घोटिया इलाके में भालू आम तौर पर देखे जाते हैं। वहीं बेलौदा-चारामा रोड के चट्टानी हिस्सों, देवपाण्डुम और दुलकी पहाड़ियों पर तेंदुए नजर आते हैं। सुरक्षा की जिम्मेदारी वन विभाग की बालोद, गुरुर और डौंडीलोहारा ब्लॉकों के कई हिस्से संरक्षित क्षेत्र घोषित हैं। जबकि डौंडी ब्लॉक पूर्ण रूप से जंगलों से घिरा है और यहीं से बस्तर की सीमा शुरू होती है। पहाड़ी और जंगलों के रास्तों से वन्यजीव लगातार आवाजाही करते रहते हैं। ऐसे में इनकी सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी वन विभाग की विशेष टीम निभाती है।
बालोद में सड़क किनारे दिखा हिरणों का झुंड VIDEO:दल्लीराजहरा जाने वाले रास्ते में अक्सर निकलते है; देखरेख की जिम्मेदारी वन विभाग की

















Leave a Reply