न्यायदान से अदालतों की पहचान:राज्यपाल सीएम बोले-मामलों के निपटारे में आई तेजी

मीडिया ट्रायल के चलते आज निचली अदालतों के सीजेएम और जिला जज जमानत देने से डर रहे हैं। इस कारण जमानत के मामले हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जा रहे हैं। बेंच को मीडिया ट्रायल से प्रभावित नहीं होना चाहिए और केस में केवल सत्यता का पता लगाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। यह बातें राज्यपाल रामेन डेका ने हाई कोर्ट के रजत जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर कहीं। उन्होंने कहा, न्यायालय अपने इन्फ्रास्ट्रक्चर से नहीं, बल्कि अपने न्यायदान से जाना जाता है। न्यायपालिका से जुड़े लोगों को अपनी निष्पक्षता बनाए रखनी चाहिए। राज्यपाल ने देश में व्याप्त इस सोच पर चिंता जताई कि सिर्फ सामर्थ्यवान को न्याय मिलता है। उन्होंने कहा, इस सोच को बदलकर यह निश्चित करना होगा कि न्याय सिर्फ सामर्थ्यवान के लिए नहीं, बल्कि सबके लिए है। यह सोच बदलना न्यायपालिका का कर्तव्य है। विधायी विभाग का बजट 29% की वृद्धि सीएम विष्णु देव साय ने कहा कि हाई कोर्ट ने बिलासपुर को ‘न्यायधानी’ के रूप में एक नई पहचान दी है। उन्होंने खुशी जताई कि हाई कोर्ट से लेकर जिला न्यायालयों में चल रहे मामलों के निपटारे में काफी तेजी आई है। लाइव स्ट्रीमिंग और एआई आधारित सर्च जैसे नवाचारों को बढ़ावा देने और डिजिटल रिकॉर्ड रूम जैसे तकनीकों को अपनाने के लिए हाई कोर्ट की सराहना की। हमारी सरकार ने 2023-24 की तुलना में वर्ष 2024-25 के लिए विधि एवं विधायी विभाग के बजट में 25 से 29% तक की वृद्धि की है।

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