छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ACB-EOW ने कांग्रेस संगठन से भी जवाब तलब किया है। एसीबी ने सोमवार को प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गैदू को नोटिस जारी कर पार्टी के कर्मचारी देवेंद्र डड़सेना की जानकारी मांगी है। वो कोषाध्यक्ष राम गोपाल का करीबी था। एसीबी ने अपने नोटिस में पूछा है कि, देवेंद्र डड़सेना पार्टी कार्यालय से किस जिम्मेदारी में जुड़े थे। उनकी नियुक्ति किसने की थी। उसे कितना वेतन मिलता था। जांच एजेंसी ने संगठन से कर्मचारी की नियुक्ति, कार्यकाल और गतिविधियों का पूरा ब्योरा उपलब्ध कराने कहा है। दबाव में एजेंसी कर रही कार्रवाई- मलकीत प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गैदू ने कहा कि, EOW ने कुछ देर पहले ही नोटिस दिया है। देवेंद्र डड़सेना के बारे में जानकारी मांगी है। डड़सेना पूर्व अकाउंटेंट था, जो अभी नहीं है। उनके बारे में तीन बिंदुओं में जानकारी मांगी गई है। नोटिस का लिखित में जवाब हम जल्द ही दे देंगे। उन्होंने कहा कि, देश की ऐसी पहली घटना होगी, जहां जांच एजेंसी राजनीतिक दल को प्रताड़ित और तंग कर रही है। राजनीतिक दबाव में कार्रवाई हो रही है, जबकि भाजपा का आरोप है कि, घोटाले की परतें खुलने पर कांग्रेस के बड़े नेता भी घेरे में आ सकते हैं। 9 घंटे ED के कार्यालय में बैठाया गैदू ने कहा कि, ED ने हमें तीन बार नोटिस दिया। तीनों बार मैंने उसका जवाब दिया है, लेकिन जिस समय जवाब देने के लिए गया, उस समय मुझे 9-9 घंटे ED के कार्यालय में बैठाया गया। ऐसे में साफ है कि बीजेपी किस तरह से केंद्रीय एजेंसियों का और जांच एजेंसियों का उपयोग कर रही है। राजनीतिक पार्टियों को कभी निशान नहीं बनाया जाता था। देश की पहली घटना है, जो बड़ी निंदनीय है। जानिए गैदू से क्या-क्या पूछा गया ? उन्होंने बताया कि, प्रवर्तन निदेशालय ने सुकमा कांग्रेस भवन से संबंधित जानकारी मांगी थी। उसमें हमसे पूछा गया था कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से कितना फंड गया। भवन का निर्माण कैसे हुआ। उसकी पूरी फाइल दस्तावेज लिखित में ED को उपलब्ध करवाई गई थी। ईडी ने लिखित में जवाब मांगा था। हमने जवाब लिखित में ही दिया। फिर भी हमें घंटों बैठाए रखना और परेशान करना सीधा झलकता है कि केंद्रीय एजेंसियां किनके इशारों पर काम कर रही है। अब जानिए क्या है पूरा मामला ? दरअसल, 28 दिसंबर 2024 को ED ने पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, उनके बेटे हरीश कवासी के घर छापा मारा था। टीम रायपुर के धरमपुरा स्थित कवासी लखमा के बंगले पहुंची थी। पूर्व मंत्री की कार को घर से बाहर निकालकर तलाशी ली थी। साथ ही कवासी के करीबी सुशील ओझा के चौबे कॉलोनी स्थित घर, सुकमा में लखमा के बेटे हरीश लखमा और नगर पालिका अध्यक्ष राजू साहू के घर पर भी दबिश दी थी। इस दौरान ED की टीम ने कई दस्तावेज जब्त किए थे। जांच में पता चला कि शराब घोटाले की कमाई के पैसे से सुकमा का कांग्रेस भवन भी बनाया गया है। क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला ? छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED जांच कर रही है। ED ने ACB में FIR दर्ज कराई है। दर्ज FIR में 2 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है। ED ने अपनी जांच में पाया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था। अब जानिए क्यों अटैच किया गया कांग्रेस भवन ? ED ने दावा किया है कि, शराब घोटाले में भ्रष्टाचार का पैसा कवासी लखमा को मिला है। लखमा को हर महीने 2 करोड़ रुपए मिलते थे। इस दौरान 36 महीने में लखमा को 72 करोड़ रुपए मिले। यह पैसे बेटे हरीश कवासी के घर निर्माण और सुकमा कांग्रेस भवन निर्माण में लगे। ED के मुताबिक कमीशन के 72 करोड़ में से 68 लाख रुपए से सुकमा में कांग्रेस भवन तैयार किया गया है। शराब घोटाले से सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ है। इसके बाद ED ने सुकमा में लखमा के मकान और रायपुर के बंगले को भी अटैच किया है। इसके साथ ही कांग्रेस भवन को भी अटैच किया है। कवासी लखमा सिंडिकेट के अहम हिस्सा कवासी लखमा 16 जनवरी 2025 से जेल में बंद हैं। ED का आरोप है कि, पूर्व मंत्री और मौजूदा विधायक कवासी लखमा सिंडिकेट के अहम हिस्सा थे। लखमा के निर्देश पर ही सिंडिकेट काम करता था। इनसे शराब सिंडिकेट को मदद मिलती थी। वहीं, शराब नीति बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे छत्तीसगढ़ में FL-10 लाइसेंस की शुरुआत हुई। लखमा को आबकारी विभाग में हो रही गड़बड़ियों की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने उसे रोकने के लिए कुछ नहीं किया। शराब सिंडिकेट के लोगों की जेबों में 3200 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध कमाई भरी गई है। प्रॉपर्टी अटैचमेंट का मतलब क्या ? अटैचमेंट का मतलब है कि संपत्ति को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया जाता है, लेकिन इसका इस्तेमाल जारी रहता है। आप उस संपत्ति का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन आप इसे बेच नहीं सकते या किसी और को ट्रांसफर नहीं कर सकते। अटैचमेंट एक कानूनी प्रक्रिया है, जो आमतौर पर तब होती है, जब कोई व्यक्ति किसी कानूनी मामले में ऋण चुकाने में विफल रहता है। किसी कांड में भ्रष्टाचार से कमाई गई प्रॉपर्टी होने का अंदेशा हो तो फैसला आने तक संपत्ति को सुरक्षित रखना जरूरी होता है, इसलिए ये कार्रवाई की जाती है।
शराब घोटाला…ACB-EOW ने कांग्रेस को भेजा नोटिस:कोषाध्यक्ष राम गोपाल के करीबी देवेंद्र डड़सेना की मांगी जानकारी, गैदू बोले- राजनीतिक दबाव में हो रही कार्रवाई

















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