कोरबा में कुआं धंसने से पति-पत्नी और बेटा दबे:पंप निकालते वक्त हादसा, बारिश के कारण रोकना पड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन; 2 महीने पहले खुदवाया था

कोरबा जिले में भारी बारिश के कारण एक कुआं धंस गया। इस हादसे में एक ही परिवार के 3 सदस्य मलबे में दब गए। मंगलवार की इस घटना के बाद रात ढाई बजे तक SDRF ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया लेकिन बारिश और अंधेरा ज्यादा होने के कारण इसे रोकना पड़ा। टीम आज फिर ऑपरेशन शुरू करेगी। मामला जटगा चौकी क्षेत्र के बनवार गांव का है। जानकारी के मुताबिक, छोटू राम श्रीवास (65), पत्नी कंचन श्रीवास (53) और बेटा गोविंद श्रीवास (30) कुएं में लगे मोटर पंप को निकालने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान अचानक पूरा कुआं धंस गया। 2 महीने पहले ही कुआं खुदवाया गया था। इस बीच मौसम विभाग ने आज मुंगेली, बेमेतरा और कबीरधाम इन तीन जिलों में यलो अलर्ट जारी किया है। दुर्ग और बिलासपुर संभाग के कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। अन्य जिलों में मौसम सामान्य रहेगा। 31 जुलाई तक यही स्थिति बनी रहेगी। इसके बाद फिर से मानसून रफ्तार पकड़ सकता है। बलरामपुर में सकेतवा बांध में दरारें पड़ी बलरामपुर में भी लगातार बारिश के बाद सकेतवा बांध में दरारें पड़ गई हैं। कई जगहों पर मिट्टी धंस गई है। भारी बारिश होने पर बांध टूटने का खतरा बना हुआ है। इससे जमुआटांड, खड़ियामार, बुद्धडीह, डूमरखोरका इन चारों गांव के 2000 लोग प्रभावित हो सकते हैं। जुलाई में 441 मिलीमीटर बारिश इस महीने की बात करें तो अब तक 441 मिमी बारिश हो चुकी है। आखिरी 6 दिनों यानी 24 जुलाई से 29 जुलाई तक 141 मिमी बारिश हुई है। पिछले दस सालों में सिर्फ दो बार ही जुलाई माह में बारिश का आंकड़ा 400MM पार हुआ है। 2023 में जुलाई माह में प्रदेश में सबसे ज्यादा 566.8MM पानी बरसा था। इससे पहले 2016 में 463.3MM पानी गिरा था। इस लिहाज से 10 साल में दूसरी बार ही प्रदेश में इतनी बारिश रिकॉर्ड की गई है। रायपुर की बात करें तो प्रदेश में इस महीने अब तक 436 MM पानी बरस चुका है। जून से अब तक 611.5 मिमी पानी बरसा छत्तीसगढ़ में 1 जून से अब तक 611.5 मिमी औसत बारिश रिकॉर्ड की जा चुकी है। बलरामपुर जिले में सबसे ज्यादा 937.2 मिमी पानी गिरा है। बेमेतरा में सबसे कम 312.7 मिमी बारिश हुई है। लंबा रह सकता है मानसून मानसून के केरल पहुंचने की सामान्य तारीख 1 जून है। इस साल 8 दिन पहले यानी 24 मई को ही केरल पहुंच गया था। मानसून के लौटने की सामान्य तारीख 15 अक्टूबर है। अगर इस साल अपने नियमित समय पर ही लौटता है तो मानसून की अवधि 145 दिन रहेगी। इस बीच मानसून ब्रेक की स्थिति ना हो तो जल्दी आने का फायदा मिलता सकता है। जानिए इसलिए गिरती है बिजली दरअसल, आसमान में विपरीत एनर्जी के बादल हवा से उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं। ये विपरीत दिशा में जाते हुए आपस में टकराते हैं। इससे होने वाले घर्षण से बिजली पैदा होती है और वह धरती पर गिरती है। आकाशीय बिजली पृथ्वी पर पहुंचने के बाद ऐसे माध्यम को तलाशती है जहां से वह गुजर सके। अगर यह आकाशीय बिजली, बिजली के खंभों के संपर्क में आती है तो वह उसके लिए कंडक्टर (संचालक) का काम करता है, लेकिन उस समय कोई व्यक्ति इसकी परिधि में आ जाता है तो वह उस चार्ज के लिए सबसे बढ़िया कंडक्टर का काम करता है। जयपुर में आमेर महल के वॉच टावर पर हुए हादसे में भी कुछ ऐसा ही हुआ। आकाशीय बिजली से जुड़े कुछ तथ्य जो आपके लिए जानना जरूरी आकाशीय बिजली से जुड़े मिथ

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *