पुलिस कमिश्नरी:पड़ोसी राज्यों में सबसे मजबूत सिस्टम भुवनेश्वर का, यहीं का सिस्टम छत्तीसगढ़ में हो सकता है लागू

राज्य में पहला पुलिस कमिश्नरी सिस्टम नवंबर से रायपुर में लागू होने वाला है। इसका खाका तैयार हो गया है और इसे जल्द ही कैबिनेट में लाकर मंजूरी दी जाएगी। इसके लिए अध्यादेश लाया जा रहा है, जिसके बाद नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। सिस्टम लागू होने के 6 माह के भीतर गृह विभाग विधानसभा में विधेयक लाकर छत्तीसगढ़ पुलिस एक्ट में संशोधन करेगा और नए कानून को जोड़ेगा। वर्तमान छत्तीसगढ़ पुलिस एक्ट में शहरी पुलिस (अर्बन पुलिस) का प्रावधान नहीं है और कहीं भी कमिश्नरी शब्द का उल्लेख नहीं है। इसलिए कुछ अधिनियमों में सुधार किया जाएगा। छत्तीसगढ़ में देश के सबसे मॉडर्न कानून ओडिशा अर्बन पुलिस एक्ट को अपनाया जा रहा है। इसमें मुंबई, दिल्ली और कोलकाता के कुछ प्रावधानों को भी शामिल किया गया है, जिसमें आबकारी संबंधित लाइसेंस और कार्रवाई का प्रावधान शामिल है। नए सिस्टम में रायपुर में पुलिस कमिश्नर के अलावा 62 अधिकारियों की तैनाती होगी। इसमें एक एडिशनल कमिश्नर (प्रशासन/ लॉ एंड ऑर्डर) और जॉइंट कमिश्नर (क्राइम/ साइबर) रहेंगे, जो डीआईजी रैंक के होंगे। शहर को चार जोन में बांटा जाएगा, 2-2 सब डिवीजन भी होंगे रायपुर में 2024 में 10 हजार से अधिक एफआईआर दर्ज हुई हैं। इसे कंट्रोल करने के लिए शहर को नए सिस्टम में चार जोन में बांटा जाएगा। ये रायपुर सेंट्रल, रायपुर नॉर्थ, रायपुर वेस्ट और नवा रायपुर होगा। हर जोन में दो-दो सब डिवीजन होंगे। जोन के प्रभारी एसपी रैंक के अधिकारी होंगे। 8 डीसीपी, 22 एसीपी/डीएसपी और 30 इंस्पेक्टर की पोस्टिंग होगी। कमिश्नरी से क्राइम कंट्रोल और पुलिसिंग में सुधार यूपी में पहली बार कमिश्नरी लागू करने वाले अफसर भास्कर एक्सपर्ट – ओपी सिंह रिटायर डीजीपी, यूपी सालों के प्रयास के बाद 13 जनवरी 2020 को लखनऊ में कमिश्नरी सिस्टम लागू हुआ। इसके लिए मुख्यमंत्री और गृहमंत्री से चर्चा की गई। फिर मसौदा तैयार किया गया। कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे लखनऊ और नोएडा में लागू किया गया। प्रधानमंत्री ने डीजी कांफ्रेंस में 15 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में इसे लागू करने का निर्देश दिया था। कमिश्नरी सिस्टम लागू होने से पुलिस के पास कई अधिकारी आ जाते हैं और पुलिस खुद फैसले लेती है। किसी से अनुमति नहीं लेनी पड़ती। कमिश्नर सीधे डीजीपी और एडीजी लॉ एंड ऑर्डर को रिपोर्टिंग करते हैं। उनके पास धारा 144 लागू करना, 188 के तहत कार्रवाई करना, गन लाइसेंस, आबकारी संबंधित कार्रवाई, जिला बदर जैसी कार्रवाई का अधिकार होता है। आईजी या एडीजी रैंक के अधिकारियों को कमिश्नर बनाना चाहिए। क्योंकि उनके पास एसपी से अधिक अनुभव होता है। इससे फैसले लेने में आसानी होती है और सही निर्णय लिए जा सकते हैं। कमिश्नरी सिस्टम से अपराध पूरी तरह नहीं रोका जा सकता, लेकिन इसे नियंत्रित किया जा सकता है। पुलिस को बार लाइसेंस जारी करने का भी अधिकार देना चाहिए।

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