धमतरी में हुई चाकूबाजी की घटना से रायपुर के तीन घरों का सहारा ही छिन गया। तीनों ही अपने घर के प्रमुख कमाने वाले थे। इसमें एक मृतक घर का इकलौता लड़का था। घर में बुजुर्ग माता-पिता हैं और उसी के कंधों पर घर की पूरी जिम्मेदारी थी। तीनों मृतक अपने दो दोस्तों के साथ जल्दी आने की बात कहकर घर से निकले थे। परिजन रात भर इंतजार करते रहे, लेकिन दूसरे दिन उनकी मौत की खबर के साथ शव घर पहुंचा। सेजबहार निवासी आलोक ठाकुर शव जब घर पहुंचा तो परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। आसपास के लोग भी गमगीन थे, क्योंकि आलोक बेहतर सुलझा हुआ लड़का था। वह घर का एक मात्र सहारा था। 2015-16 में उसके पिता का एक्सीडेंट हो गया था, जिसमें उनका एक पैर कट गया। वे बिस्तर में चले गए। यह सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाए और खुदकुशी कर ली। तब से आलोक ने ही घर को संभाला था। वह ठेकेदारी करता था। पेटी कांट्रेक्ट लेकर काम करता था। रविवार को उसे लड़की वाले देखने आए थे। आलोक का रिश्ता तय हो गया था और इसी साल शादी होने वाली थी। आलोक की बहन ने बिलखते हुए कहा- एक दिन पहले ही घर पर खुशियां आई थी। ये इतनी जल्दी गम में बदल जाएगा किसी ने सोचा नहीं था। एक दिन पहले ही मैंने उसकी कलाई में राखी बांधी थी। मेरे भाई के हत्यारों को फांसी पर लटका देना चाहिए। उन्हें जिंदा नहीं छोड़ना चाहिए। तीनों दोस्तों की अंतिम विदाई भी एक साथ तीनों दोस्त सुरेश, नितीन और आलोक का शव एक साथ धमतरी से लाया गया। तीनों को एक साथ अंतिम विदाई दी गई और संतोषी नगर मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार भी एक साथ किया गया। तीनों के साथ रायपुर से दो और लड़के गए थे। धमतरी में भी उनके दो और दोस्त मिले। घटना के बाद चारों वहां से भाग गए। चारों ने भागकर जान बचाई। मृतक नितीन की मां बोलीं- रोज की तरह घर से निकला, लौटा नहीं मां नीरी तांडी ने बताया कि नितीन रोज की तरह 11 अगस्त को सुबह टिफिन लेकर घर से निकला था। वह लौटकर नहीं आया। नितिन धमतरी में महिला बाल विकास विभाग की एक महिला अधिकारी की गाड़ी चलाता था। रोज धमतरी आता था। वह किसके साथ आया था, यह भी उसे नहीं पता। मंगलवार सुबह वह जिला अस्पताल मोड़ के पास एक मेडिकल दुकान के सामने बैठी थी। रो-रोकर उसका बुरा हाल था। नितिन की शादी 5 साल पहले हुई थी। उसके दो छोटे बच्चे हैं। नन्ही सी परी बोल रही थी, पापा उठो न… संतोषी नगर में रहने वाले मृतक सुरेश तांडी की दो साल की बेटी है। उसे समझ नहीं आ रहा था कि घर पर सुबह से ही इतनी भीड़ क्यों है? सब क्यों रो रहे हैं? वह भी सबको देखकर रोने लगती और कभी चुपचाप होकर सबको निहारती। जब उसके पिता सुरेश का शव आया तो सबने उसे घेर लिया। दो साल की बच्ची डॉली पहले अपनी मां के गोद में आई। वह अपने पिता को देखते ही उठने के लिए कहने लगी। वह पिता को बार-बार छू रही थी और कह रही थी पापा…, पापा…। यह देखकर हर किसी के आंखों में आंसू आ गए। 35 साल की नीरा सोनी ने बताया कि सुरेश (33) उसका छोटा भाई था। वे लोग दो भाई और एक बहन होते हैं। भाई-बहन में नारायण सबसे बड़े, फिर वह और छोटा सुरेश था। एक दिन पहले शनिवार को सुरेश को राखी बांधी, उसने उपहार भी दिया था। उसने मेरी रक्षा करने का वादा किया था। मैंने भी भगवान से प्रार्थना की थी कि मेरे भाई की हमेशा रक्षा करें। लेकिन भगवान ने मेरे छोटे भाई को छीन लिया। पहले पापा गए और अब छोटा भाई। घर पर मां आशा और बहू अंजू रहती हैं। खौफनाक वारदात को इस तरह समझें रात 11.08 बजे- नशे में धुत 8 बदमाश मां अन्नपूर्णा ढाबा के सामने सड़क से गुजरते हाईवा और कारों को रोककर मारपीट की। लूटपाट की कोशिश की। चाकू दिखाकर लोगों को धमकाया। रात 11.15 बजे रायपुर से 4 युवक कार में ढाबा पहुंचे। बदमाशों ने उन्हें अपशब्द कहे। जेब से खंजर निकालकर दो युवकों पर वार किया। दोनों स्टेट हाईवे पर खून से लथपथ गिर पड़े। दोनों की मौत हो गई। रात 11.21 बजे- एक अन्य युवक जान बचाकर भागा। ढाबे से 100 मीटर दूर बदमाशों ने उसे घेरा और खंजर से उसकी छाती में वार किया। युवक करीब 50 मीटर दूर एक टायर दुकान तक पहुंचा। उसकी भी मौत हो गई।
रायपुर के 3 घरों का सहारा छिना:लॉन्ग ड्राइव पर निकले थे तीनों दोस्त, बेजान लौटे… एक दिन पहले तय हुई थी आलोक की शादी, खुशियों पर बिजली गिरी

















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