ग्रामीणों के खेतों पर तांत्रिक का आश्रम:सड़क से नदी तक कब्जा, एक करोड़ में दे दी 14 एकड़ और जमीन

कारोबारी से ठगी के मामले में जेल में बंद कथित तांत्रिक के केस में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। मुंगेली के मोतिमपुर में सरकारी जमीन पर कब्जा कर बनाए गए तांत्रिक के आश्रम को कांग्रेस सरकार ने 14 एकड़ से अधिक बेशकीमती जमीन महज एक करोड़ रुपए में आवंटित कर दी। ये पूरी जमीन चरई मद की है, जो निस्तार के काम आती है। फरवरी 2023 में आवंटन आदेश जारी हुआ। इसकी सिफारिश बाकायदा इंटर डिपार्टमेंट कमेटी ने की थी। यह आश्रम और इसके संचालक केके श्रीवास्तव तब सुर्खियों में आए थे, जब इनके घर व आश्रम में तत्कालीन सीएम भूपेश बघेल का नियमित आना-जाना शुरू हुआ। आश्रम के बाहर उनके लिए हेलिपैड भी बनाया गया है। बिलासपुर से करीब 35 किमी दूर मोतिमपुर में है अनुरागी धाम। यह मुंगेली जिले के मोतिमपुर पंचायत में आता है। कांग्रेस के पांच साल के कार्यकाल में खूब सुर्खियों में रहा। वजह थी, इस आश्रम के संचालक केके श्रीवास्तव से पूर्व सीएम भूपेश बघेल की घनिष्टता। इन्हीं पांच सालों में आश्रम खूब फैला। मोतिमपुर के सरपंच प्रहलाद पोर्ते कहते हैं, आश्रम ने गांव की कई एकड़ जमीन पर कब्जा किया है। बताते हैं, हाल ही में मुंगेली जिले के राजस्व अमले ने आश्रम का जायजा लिया था। रिकॉर्ड चेक करने पर अधिक जमीन पर कब्जे की बात सामने आई। आईडीसी ने की थी अनुशंसा: सरकारी जमीन के आवंटन के मामले सरकार की इंटर-डिपार्टमेंट कमेटी को जाते हैं। राजस्व मंत्री की अध्यक्षता में बनी इस समिति में वित्त के प्रमुख सचिव-वित्त के अलावा राजस्व, आवास, पर्यावरण विभाग के सचिव सदस्य होते हैं। इस समय राजस्व मंत्री जय सिंह अग्रवाल थे। समिति की अनुशंसा के बाद राजस्व के तत्कालीन अवर सचिव उमेश कुमार पटेल ने 15 फरवरी 2023 को आवंटन पत्र जारी किया था। सीमांकन कर सरकारी जमीन मुक्त कराएं- मोतिमपुर के सरपंच प्रहलाद पोर्ते, उप सरपंच रूपेंद्र दिवाकर, पंच जयराम साहू, जलेश्वर राजपूत ने प्रशासन से मांग की है कि आश्रम व आसपास की सारी जमीन का सीमांकन हो, ताकि सरकारी व चारागाह की जमीन मुक्त कराई जा सके। जो जमीन आश्रम को दी गई है, वहां 20 से 25 लाख रुपए एकड़ कीमत चल रही है। मुंगेली के मोतिमपुर में है अनुरागी आश्रम, पूर्व सीएम के लिए हेलिपैड बना, नदी का किनारा भी कब्जे में नदी तक साम्राज्य…75 डिसमिल जमीन खुद की, बाकी ग्रामीणों के नाम अनुरागी धाम गांव की मुख्य सड़क से शिवनाथ नदी तक फैला हुआ है। यहां एक मंदिर के अलावा बड़ा गार्डन, रेस्ट रूम वाली आलीशान बिल्डिंग बनी हुई है। नदी के किनारे पर कब्जा कर गार्डन डेवलप किया गया है। रिकॉर्ड के अनुसार खसरा 197 की 75 डिसमिल जमीन अनुरागी धाम के कपिल कुमार श्रीवास्तव के नाम पर दर्ज है। इसके अलावा 6 खसरा नंबरों की 2.40 एकड़ जमीन गांव के अलग-अलग लोगों के नाम पर दर्ज है। जमीन के लिए आवेदन किया: ट्रस्टी भास्कर टीम आश्रम पहुंची तो ट्रस्ट के संजय श्रीवास्तव आश्रम में मौजूद नहीं थे। फोन पर श्रीवास्तव ने बताया​ कि कुछ माह पहले हमने सरकारी जमीन आवंटित करने के लिए आवेदन किया था, ताकि गांव वालों के विकास के लिए कुछ किया जा सके। जबकि सच यह है कि जमीन आवंटित की जा चुकी है। प्रीमियम की राशि जमा न होने के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं हुई और न ही रिकॉर्ड में नहीं चढ़ी। कुछ खरीदी, बाकी पर कब्जा: पंचायत सरपंच प्रहलाद पोर्ते ने बताया, आश्रम में काफी पहले एक यादव नामक नौकर था। यहां रहकर काम करता था। बाबा ने उसी से 70 डिसमिल जमीन खरीदी थी। जब बाबा की मृत्यु हुई तब केके श्रीवास्तव ने गांव वालों से कहा कि बाबा की अंत्येष्टि यहीं करेंगे। उनकी समाधि स्थल भी बनाई गई। पास की सरकारी जमीन और चारागाह की जमीन आश्रम के अधीन आती गई। काफी पहले सरगांव तहसील में केस भी चला था। राजनीतिक संरक्षण से बढ़ाई संपत्ति कांग्रेस सरकार के दौरान केके श्रीवास्तव ने आश्रम की संपत्ति बढ़ाने के लिए खूब पैंतरे आजमाए। रातों-रात कब्जे की जमीन के राजस्व ​अभिलेखों के अनुसार कागजात भी तैयार किए गए। सरपंच के मुताबिक, मोतिमपुर में अधिकतर लोग आदिवासी हैं। फर्जी तौर पर सरकारी व निजी जमीन के कागजात बनाने की जानकारी मिलने पर भाजपा नेता धरमलाल कौशिक से संपर्क कर शिकायत की थी। आश्रम के कब्जे में सरकारी जमीन भी है।
समाधिस्थल के आसपास, हेलीपेड, गार्डन और नदी का किनारा, सब सरकारी है। इन शर्तों पर दी गई जमीन रायपुर रोड से भीतर मोतिमपुर रोड के किनारे खसरा नंबर 74/4, 83, 84, 200/1 और 200 की 5.813 हेक्टेयर यानी 14.36 एकड़ जमीन अनुरागी धाम संस्था को 30 साल की लीज पर दी गई है। ये सारी जमीन चरई मद की है। इसके लिए शर्त यह तय की गई कि संस्था खुद के खर्च पर बच्चों के लिए खेल मैदान, पौधरोपण, नि:शुल्क भंडारा, स्वास्थ्य शिविर जैसी गतिविधियां करेगी। जमीन के एवज में 1.08 करोड़ रुपए का शुल्क तय किया गया है। कौन है केके श्रीवास्तव? मूलत: चिरमिरी के और वर्तमान में बिलासपुर के निवासी केके श्रीवास्तव अविभाजित मध्यप्रदेश के समय रतनपुर निकाय में रहे। दिल्ली में बने संपर्कों के जरिए सरकार के लोगों से जुड़े और बाद में भूपेश सरकार में खूब चली। बघेल उनके यहां नियमित पूजा-पाठ करवाने जाते थे। छत्तीसगढ़ से दिल्ली तक बने संपर्कों का नतीजा यह है कि हालिया जांच में श्रीवास्तव के खातों में 300 करोड़ का लेनदेन पता चला है। ठगी के मामले में जेल में बंद: बता दें कि केके श्रीवास्तव पर तेलीबांधा थाने में ठगी का केस दर्ज है। यूपी के रावत एसोसिएट के मालिक अर्जुन रावत को 500 करोड़ का प्रोजेक्ट दिलाने का झांसा देकर 15 करोड़ रुपए ठगने का आरोप है। पुलिस ने श्रीवास्तव के बेटे कंचन को भी गिरफ्तार किया है। जानकारी में नहीं है, कार्रवाई करेंगे
अनुरागी धाम को शासकीय जमीन आवंटन के बारे में कोई जानकारी नहीं है। ऐसी कोई शिकायत आई तो जरूर कार्रवाई की जाएगी।
टंकराम वर्मा, राजस्व मंत्री, छत्तीसगढ़ ऐसे मामले पहले समिति में आते हैं
अनुरागी धाम को जमीन देने का मामला पहले अंतर विभागीय समिति में आया होगा। इसके बाद ही कोई शासकीय जमीन आवंटित की जा सकती है।
उमेश कुमार पटेल, तत्कालीन अवर सचिव- राजस्व

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