जिले में देवी महिमा की कहानियां उनके मंदिरों से सुनने व देखने को मिलती है। इसमें खास मंदिर है मां मड़वारानी। यह मंदिर कोरबा, छत्तीसगढ़ ही नहीं देश का संभवत: पहला मंदिर है, जहां नवरात्र की शुरुआत प्रथमा से नहीं, पंचमी तिथि से होती है। मां मड़वारानी जिला मुख्यालय से 22 किमी दूर कोरबा-चांपा मुख्य रोड से 5 किमी दूर 2200 फीट ऊंची पहाड़ी पर विराजमान हैं। प्राचीन देवी मंदिर के स्थापना वर्ष को लेकर कोई उल्लेख इतिहास में नहीं मिलता है। यहां के निवासियों के लिए कई पीढ़ियों से यह मंदिर आस्था का केंद्र बना हुआ है। इस मंदिर में नवरात्र मनाने की अलग परंपरा चली आ रही है। पहाड़ी की चोटी पर देवी मां एक हैं, लेकिन मंदिर दो हैं। दोनों की मान्यता एक ही है। कलमी पेड़ स्थित मां मड़वारानी दरबार के बैगा हैं सुरेन्द्र कुमार कंवर, तो दूसरे मंदिर के बैगा रूप सिंह कंवर हैं। मंदिर में नवरात्र की शुरुआत को लेकर उनका कहना है कि शारदीय नवरात्र हो या फिर चैत्र नवरात्र, यहां पंचमी के दिन ही घट स्थापना कर नवरात्र मनाई जाती है। ऐसी भी है मंदिर की मान्यता
मान्यता है कि मां मड़वारानी शादी का मंडप छोड़कर पहाड़ पर पहुंची थीं। तब उनके शरीर पर लगी हल्दी मुख्य मार्ग के एक पत्थर पर गिर गई। इसके कारण सड़क किनारे मां मड़वारानी का मंदिर बना। दूसरी कहानी मे मां मड़वारानी भगवान शिव से कनकी में मिली और मड़वारानी पर्वत पर आईं। जिन्हें मांडवी देवी के नाम से भी जाना जाता है।
पहाड़ियां देती हैं सुकून
मां मड़वारानी मंदिर तीन दिशाओं में प्राकृतिक सौंदर्य को समेटे पहाड़ियों से घिरा हुआ है। चौथे दिशा में पहाड़ी के नीचे हसदेव नदी की तराई का मनोरम नजारा देखने लायक होता है।
कोरबा-चांपा मार्ग पर 2200 फीट ऊंची पहाड़ी पर है मंदिर:मां मड़वारानी- देश का पहला देवी मंदिर जहां प्रथमा नहीं पंचमी से शुरू होती है नवरात्र

















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