ये गलत है…:नियम सबके लिए, लेकिन मंत्री-सांसद-विधायक तोड़ रहे सिग्नल

सड़क पर चलने के नियम-कानून आम जनता के लिए बने हैं। जबकि कानून तोड़ने पर माननीयों पर कोई कार्रवाई भी नहीं होती। इसे सामने लाने के लिए भास्कर ने एक हफ्ते तक राजधानी की सड़कों पर रेड सिग्नल के बावजूद दौड़ रहीं मंत्री और विधायकों के वाहनों को ट्रैक किया। उनकी तस्वीरें लीं। इन तस्वीरों में साफ नजर आ रहा है कि माननीय ट्रैफिक नियम तोड़ रहे हैं। शंकर नगर टर्निंग पॉइंट पर लगे सिग्नल का टाइमर 160 सेकंड के लिए सेट है। शंकर नगर- विधानसभा दोनों ओर आने-जाने के लिए 45 सेकंड और बीटीआई रोड-लोधीपारा की ओर आने-जाने के लिए 35 सेकंड के लिए ग्रीन सिग्नल मिलता है। औसतन 120 सेकंड के लिए सिग्नल रेड होता है। इस बीच टीम ने पाया कि अधिकांश मंत्रियों ने रेड सिग्नल जंप किया। मंत्री लखन लाल देवांगन की गाड़ी CG02BA0002 व दूसरी गाड़ी CG02AU2261 शंकर नगर टर्निंग पॉइंट पर रेड सिग्नल होने के बावजूद उसे जंप कर आगे बढ़ गई। मंत्री-सांसद-विधायक भी नियमों के दायरे में मोटर व्हीकल एक्ट 1988 और ट्रैफिक नियमों के अनुसार सभी वाहन चालकों को ट्रैफिक सिग्नल का पालन करना अनिवार्य है। मंत्री-सांसद-विधायक या सरकारी अधिकारी को इसमें छूट नहीं है। गृह मंत्रालय के एक आरटीआई के जवाब के अनुसार केवल केवल राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और विदेशों से आने वाले विशेष अतिथि (दोनों एमएच/पीएम सुरक्षा कवर के अंतर्गत) के लिए ही ट्रैफिक रोका जा सकता है। किसी भी मंत्री या अन्य वीआईपी के काफिलों के लिए यह अनुमति नहीं है। ऐसी है सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट ने वीआईपी कल्चर खत्म करने के लिए एक व्यवस्था दी थी। कहा- लाल बत्ती लगाना और सायरन बजाना स्टेटस सिंबल बन गया है, जो समाज के लिए दिक्कत है। सरकार को इसे रोकना चाहिए। इसके बाद सरकार ने लाल बत्ती पर रोक लगा दी थी। लाल बत्ती का उपयोग केवल आपातकालीन सेवाओं और कानून-व्यवस्था से जुड़े वाहनों के लिए किया जा सकता है।

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