आज 33 जिलों में अलर्ट…दक्षिणी हिस्से में भारी बारिश होगी:बंगाल में बने सिस्टम से 2 दिन ऐसा ही मौसम;महानदी में फंसे युवक को बचाया

बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम के असर से आज पूरे छत्तीसगढ़ में यलो अलर्ट जारी किया गया है। अगले दो दिनों तक कई जिलों में भारी बारिश की संभावना है, खासकर दक्षिणी छत्तीसगढ़ में। इसके बाद बारिश की तीव्रता में कमी आने की संभावना है। पिछले 24 घंटों में प्रदेश के कई हिस्सों में जोरदार बारिश दर्ज की गई। रायपुर शहर में 76 मिमी, आरंग में 132 मिमी और गोबरा-नवापारा में 143 मिमी बारिश हुई। रायपुर जिले में औसतन 85 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। दुर्ग और बस्तर संभाग के कुछ इलाकों में भी अच्छी बारिश हुई है। इसी दौरान आरंग में एक युवक महानदी के टीले पर फंस गया, जिसे पुलिस और SDRF की टीम ने रेस्क्यू किया। जानकारी के मुताबिक, युवक का पत्नी से झगड़ा हुआ था, जिसके बाद वह बियर पीकर नदी किनारे टीले पर सो गया। पानी का स्तर अचानक बढ़ने से वह फंस गया और मदद के लिए चिल्लाने लगा। वहां घूमने पहुंचे कुछ लोगों ने उसे देखा और तत्काल पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने SDRF की मदद से युवक को सुरक्षित बाहर निकाला। बारिश से गरबा प्रभावित वहीं पिछले दिनों हुई बारिश का असर गरबा आयोजनों पर भी देखने को मिला। कई शहरों में गरबा मैदानों में पानी भरने या गीली जमीन के कारण आयोजन रद्द या स्थगित करने पड़े। कुछ स्थानों पर कार्यक्रम हुए भी तो वहां लोगों की संख्या कम रही। रायपुर के ओमाया गार्डन रिजॉर्ट में होने वाले गरबा कार्यक्रम की तारीख बदल दी गई है। पहले यह 25 से 28 सितंबर तक आयोजित होना था, लेकिन मौसम को देखते हुए इसे 27 से 29 सितंबर किया गया है। बलराम में सबसे ज्यादा बारिश, बेमेतरा में सबसे कम प्रदेश में अब तक 1127.6 मिमी बारिश हुई है। बेमेतरा जिले में अब तक 509.1 मिमी पानी बरसा है, जो सामान्य से 51% कम है। अन्य जिलों जैसे बस्तर, राजनांदगांव, रायगढ़ में वर्षा सामान्य के आसपास हुई है। जबकि बलरामपुर में 1498.6 मिमी पानी गिरा है, जो सामान्य से 53% ज्यादा है। जानिए क्यों गिरती है बिजली बादलों में मौजूद पानी की बूंदें और बर्फ के कण हवा से रगड़ खाते हैं, जिससे उनमें बिजली जैसा चार्ज पैदा होता है। कुछ बादलों में पॉजिटिव और कुछ में नेगेटिव चार्ज जमा हो जाता है। जब ये विपरीत चार्ज वाले बादल आपस में टकराते हैं तो बिजली बनती है। आमतौर पर यह बिजली बादलों के भीतर ही रहती है, लेकिन कभी-कभी यह इतनी तेज होती है कि धरती तक पहुंच जाती है। बिजली को धरती तक पहुंचने के लिए कंडक्टर की जरूरत होती है। पेड़, पानी, बिजली के खंभे और धातु के सामान ऐसे कंडक्टर बनते हैं। अगर कोई व्यक्ति इनके पास या संपर्क में होता है तो वह बिजली की चपेट में आ सकता है।

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