छत्तीसगढ़ के बस्तर, कांकेर, कोंडागांव, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर जैसे जिलों के 60 गांवों में पलायन काफी हद तक कम हुआ है। इन गांवों के 1200 से ज्यादा युवाओं को पर्यटन की ट्रेनिंग दी गई है। इससे पर्यटकों को सुविधाएं और स्थानीय युवाओं को रोजगार मिला है। युवाओं को पर्यटकों के लिए ट्रेंड कर इस इलाके की तस्वीर बदलने की शुरुआत जीत सिंह आर्य और उनकी टीम ने की है। उन्होंने बस्तर की उस सांस्कृतिक, प्राकृतिक और ऐतिहासिक विरासत को सामने रखा, जो सालों से छिपी हुई थी। बस्तर के झरने, गुफाएं, घोटुल परंपरा, लोकगीत, त्योहार और ग्रामीण जीवनशैली को स्थानीय लोगों के जरिए अनुभव कराना ही इस पहल की खासियत है। जीत सिंह आर्य ने रायपुर में टेड-एक्स के मंच से बताया कि एमबीए की पढ़ाई के बाद वे मार्केट-रिसर्च और बिजनेस कंसल्टिंग फील्ड में थे। इसके बाद डाटा-रिसर्चर से लेकर चीफ ऑपरेशंस ऑफिसर बने। फिर नौकरी छोड़कर ‘अनएक्सप्लोर्ड बस्तर’ प्रोजेक्ट की शुरुआत की। अब इसकी पहुंच करीब 60 गांवों तक हो गई है। स्थानीय युवा पर्यटकों के लिए गाइड, पोर्टर जैसे काम करते हैं। उन्हें अपने घरों में होम स्टे की सुविधाएं देते हैं। कई युवा पर्यटकों के लिए सांस्कृतिक आयोजन करते हैं। स्वयं सहायता समूहों के जरिए चित्रकोट, तीरथगढ़, पालनार जैसे कई इलाकों में 3 हजार लोगों को आजीविका मिली है। इससे हर साल करीब 2 करोड़ रु. का टर्नओवर हो रहा है। अब बस्तर संभाग से बाहर भी गांवों और युवाओं को जोड़ने की तैयारी शुरू की गई है। छत्तीसगढ़ के गांवों में वॉलेंटियर टूरिज्म की शुरुआत इस साल ‘अनएक्सप्लोर्ड बस्तर’ ‘वॉलेंटियर यात्रा’ के साथ मिलकर अब छत्तीसगढ़ के गांवों की ऐसी यात्राएं करवा रहे हैं, जिनमें पर्यटक गांवों में रहकर ग्रामीणों के साथ उनके काम में हाथ बंटाते हैं। छत्तीसगढ़ में वॉलेंटियर टूरिज्म शुरू करने का मकसद है- घूमो, समझो और कुछ अच्छा करके लौटो।
अनएक्सप्लोर्ड बस्तर:60 गांवों के 1200 युवाओं को टूरिज्म की ट्रेनिंग बस्तर

















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