एक्सप्रेस वे के दोनों तरफ दीवार बनाने का काम अटका:एक्सप्रेस-वे में दर्जनों अवैध दरवाजे, दीवार बनाने सालभर चली फाइल, बजट मिला न फाइल लौटी

रायपुर-धमतरी छोटी लाइन पर 295.67 करोड़ की स्वगत से एक्सप्रेस वे का निर्माण किया गया है। इसका मकसद है कि रेलवे स्टेशन से रादाणी दरबार तक बने 12 किलोमीटर संबं एक्सप्रेस-वे में कोई कट नहीं होगा। एक्सप्रेस वे में कोई प्रवेश ना कर सके, एमके लिए सड़क के दोनों ओर लोहे की शिन लगाई गई थी। लेकिन समय-समय पर ये कई जगहों से हो गई है। वर्तमान स्थिति ये है कि करीब 70 फीसदी बिल चोरी हो गई है। इसी समस्या से निपटने के लिए सरकार ने साल 2034-25 के बक्ट में एकमकोस-वे के दोनों तरफ कर्मकोट की दीवार बनाने के लिए 17 वनरोड़ रुपए की मंजूरी दी। चवट मंजूरी मिलते ही लोक निर्माण विभाग ने अगस्त 2024 में इपका कोटेशन बनाकर शासन को भेजा। शासन की ओर से इसमें दो वेरो आई, जिसे दूर कर फाइल मुख्यालय लौटा दी गई पीडब्ल्यूडी ने महीनेभर बाद ही सितंबर 2024 में मुख्यालय की ओर से आई कोरी को दूर कर दोबारा फड़ल भेज दिया। लेकिन एक साल बाद भी शासन से वो बइल लौटाई और न ही बजट की मंजूरी दी। यही कारण है कि एक्सप्रेस वे के दोनों तरफ दीवार बनाने का काम शुरू नहीं हो पाया। इसका फायदा उठाकर लोग एक्सप्रेस से सहकर बड़ी इमारत बनाकर मेट सीधे एक्सप्रेस पर खोल रहे हैं। इससे सड़क हादसे की आशंका बढ़ गई है। रॉन्ग साइड के लिए लगाए गए टायर किलर भी निकले : कुछ महीने पाले संग साहद चालने पाचों को रोकने के लिए देवेंद्र नगर और आनं जिन के नीचे टायर किलर लगाए गए थे. लेकिन ये भी निकाल दिए गए हैं। सबसे ज्यादा परेशानी देवेंद्र नगर पर होती है। यहां पुराना बस स्टैंड के पीछे एक कॉम्यारिषय में पा पहुंच सेवा का आउटलेट खुला है। ऐसी में देवेंद्र नगर की ओर से इनकी गाड़ियां रॉन्ग साइड से जाती हैं। यही हात शंकर नगर, कुंडता चौक पर भी है। शदाणी दरबार के पहले चल रहा निर्माण कार्य, मवेशियों का जमावड़ा भी शदाणी दरबार के पहले तालाब के पास स्टेशन की ओर से जाने पर एक्सप्रेस-वे की एक लेले पर निमर्माग सामागे रख दी गई है। पीडब्ल्यूडी के अफसर कार्रवाई करने के बजाय ज्ञकिते तक नहीं। यही नहीं, एक्सप्रेस-वे पर नर्वेशयों का जमावड़ा भी रहता है, जिनसे खतरा है। मंजूरी नहीं मिली तो, 6 महीने में रद्द हो जाएगा प्रोजेक्ट पीडब्ल्यूडी के नियम के मुताबिक यदि प्रोजेक्ट के लिए दो साल तक बलट की मंजूरी नहीं मिलती है तो या प्रोलेका रद्द हो जाता है। बजट 2024-25 में पास हुआ है। ऐसे में मुख्यलय में से 31 मार्च 2020 तक प्रोजेक्ट की मंजूरी नहीं मिलती हो यह यह रद्द हो जाएगी। ऐसे में बिटको मंजूरी के लिए दोबारा से फसल शासन स्तर पर भेजनी होगी। पीडब्ल्यूडी के अफसरों का कहना है कि शासन स्तर पर ही सारी चीजें वेंडिंग मंजूरी मिलने के चाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। एक्सप्रेस-वे की ज्यादातर लाइटें खराब रेलवे स्टेशन से शधाणी दरबार के बीच करीब 12 किमी लंबे एक्सप्रेस-वे में 472 बिनाली के शुभ हैं। इनमें से ज्यादातर की लाइट खराब हैं। शंकर नगर जिन के अपा लाइट नहीं जल रही है। भास्कर टीम ने इस हफ्ते तीन दिन एयाडोनर का निरीक्षण किया। स्टेशन से शदायी दरबार के बीच कई जगह अंभेश है। जानिए, क्यों हुआ था एक्सप्रेस-वे का निर्माण सड़क विशेषज्ञों के अनुसार शहर के भीतर एक्सप्रेस-वे बनने से रेलवे स्टेशन के तिका बातापात का दबाव काफी कम हो गया है। पहले स्टेशन आने जाने के लिए यात्रियों को शहर के भीतरी इलाकों से होकर गुजरना पड़ता था, लेकिन एक्सप्रेस-वे बनने बनने से फरकाडीह चौक, अंबेडका चौक शास्त्रों आदि के ट्रैफिक सिग्नलों को पार नहीं करना पड़ता है। यात्री सर्विस रोड से सोधे फ्लाईओवर पर आ जाते हैं। इससे स्टेशन, एयरपोर्ट और नवा रायपुर आना- आना-जाना आसान हो गया है।

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