जहां मारे गए 10 नक्सली…वहां पहुंची भास्कर टीम:16 घंटे मुठभेड़, 400 जवानों को खरोंच तक नहीं, हथियार लहराकर जश्न मनाया,गरियाबंद में नक्सल-तेलुगू-लीडरशिप का सफाया

गरियाबंद के मैनपुर ब्लॉक में ओडिशा से लगे सीमावर्ती गांव मटाल में 10 सितंबर को पुलिस-नक्सली मुठभेड़ में 5 करोड़ के इनामी 10 नक्सली मारे गए। इनमें अकेले मोडेम बालाकृष्णा पर करीब 2 करोड़ का इनाम था। नक्सल ऑपरेशन 12 सितंबर सुबह 5:30 बजे खत्म हुआ, और उसके बाद भास्कर की टीम रायपुर से मटाल के ग्राउंड जीरो (ऑपरेशन स्थल) पर पहुंच गई। जहां देखा कि फोर्स के जवान पहाड़ी पर जश्न मना रहे थे। ये जश्न इसलिए था क्योंकि 9-10 सितंबर से जवान ऑपरेशन के लिए निकले थे, और बिना रुके-थके ये अंत तक डटे रहे, जब तक कि इन्होंने नक्सलियों को ढेर नहीं कर दिया। इतने बड़े मुठभेड़ में किसी भी जवान को एक खरोंच तक नहीं आई। मुठभेड़ के बाद फोर्स वापस लौट रही थी और रास्ते भर रिपोर्टर्स ने इनसे बात की। उन्होंने कहा- वे अगले ऑपरेशन के लिए तैयार हैं। गरियाबंद के मटाल की पहाड़ी पर जहां 10 नक्सली मारे गए… वहां से भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट पढ़िए:- पहलें जवानों की ये तस्वीरें देखें- 400 जवानों ने घेरा था इस ऑपरेशन की सबसे खास बात यह थी कि 400 जवानों ने नक्सलियों की घेराबंदी की थी। साढ़े 16 घंटे चली फायरिंग के बाद भी एक जवान को खरोंच तक नहीं आई। सभी सुरक्षित गरियाबंद-मैनपुर कैंप में लौटे। 10 नक्सली भागे, सर्चिंग जारी ऑपरेशन के दौरान 10 नक्सली भागने में सफल रहे, इनकी भी सर्चिंग जारी है मुठभेड़ में दोनों ओर से फायरिंग हुई। पेड़ों पर गोलियों के निशान थे और जगह-जगह खोखे ​बिखरे हुए थे। भास्कर रिपोर्टर्स ने राजाडेरा, मटाल के ग्रामीणों से बात की। मगर, इनमें एक भी घटना से संबंधित कोई जानकारी नहीं थी। इन्होंने इतनी पुष्टि जरूर कर दी, नक्सलियों का बीते सालभर से मूवमेंट काफी बढ़ा है। इधर, शुक्रवार (12 सितंबर) को बीजापुर के गंगालूर थाना क्षेत्र में जवानों के ऑपरेशन में 2 नक्सली ढेर हो गए हैं। मौके से शव बरामद कर लिए गए हैं। इसके साथ ही 303 राइफल, अन्य हथियार, विस्फोटक व दैनिक उपयोग का सामान भी बरामद किया गया है। नक्सली शव न ले जा पाएं, इसलिए उनकी भी घेराबंदी मटाल, मैनपुर के कुल्हाड़ी घाट क्षेत्र में 5 किमी ऊंची खड़ी पहाड़ी पर 10 घरों का गांव है। इससे 3 किमी दूर मुठभेड़ हुई थी। जिसके बाद सारे नक्सलियों के शव मटाल ही लाए गए। भास्कर टीम 5 किमी का पहाड़ी रास्ता पैदल नापते हुए 2 घंटे में मटाल पहुंची तो फोर्स के जवान शवों के पास घेराबंदी करके बैठे हुए थे, क्योंकि कई बार देखा गया है कि नक्सली शव उठाकर भागते हैं। मटाल की पहा​ड़ी पर जवानों ने जश्न मनाया और थिरके भी। भारत माता की जय, वंदे मातरम और गणपति बप्पा मोरिया के नारे, जयकारे लगा रहे थे। एके-47 से लैस हर एक जवान की आंखों में नक्सलियों को मिटा देने का जज्बा दिखा। 2 साल, 5 मुठभेड़: हर बार चकमा देकर बच निकलता था बालाकृष्णा इस एनकाउंटर में सेंट्रल कमेटी (CC) मेंबर 1.8 करोड़ का इनामी नक्सली बालाकृष्णा भी मारा गया। मारे गए 1.8 करोड़ रुपए के इनामी नक्सली मोडेम बालाकृष्णा से पुलिस की पिछले 2 साल में 5 बार मुठभेड़ हुई। हर बार बच निकलता था। जनवरी में मुठभेड़ में जब नक्सल नेता चलपति मारा गया था, तब भी बालाकृष्णा जंगल का फायदा उठाकर फरार हो गया था। जनवरी में मटाल से ही लगी पहाड़ी (5 किमी) पर सेंट्रल कमेटी मेंबर चलपति को ढेर कर दिया गया था। बालाकृष्णा, चलपति का सीनियर था। इन दोनों की मौत से अब गरियाबंद में सक्रिय नक्सलियों की तेलुगू लीडरशिप खत्म हो चुकी है। इनके अलावा अब डिवीजन को लीड करने वाला कोई ​भी तेलुगू लीडर नहीं बचा। चलपति और बाला तो बस्तर तक सक्रिय थे। जो बचे हैं वे लोकल नक्सली हैं, इनमें कोई बड़ा नाम नहीं है जो लीड कर सके। 2 साल पहले 85 कैडर थे, अब इनकी संख्या घटकर 30 रह गई है। 16 घंटे चली मुठभेड़: सुबह बंद हुई फायरिंग, जनवरी से था मूवमेंट पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ 16 घंटे चली। जवानों ने बताया कि गुरुवार और शुक्रवार को रातभर नक्सलियों की ओर से फायरिंग की गई। इलाके ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में नक्सलियों का मूवमेंट जनवरी 2025 से बढ़ गया था। नक्सली यहां लगातार आ रहे थे। ग्रामीण खौफ में… सामान्य बातचीत में पुलिस को नाम भी नहीं बता रहे ग्रामीण पुलिस को खुद के वास्तविक नाम तक नहीं बता रहे हैं। ग्रामीण धनवाय कहते हैं कि उन्हें मुठभेड़ के दौरान पुलिस और नक्सलियों की ओर से हुई गोलीबारी की भी आवाज नहीं सुनाई दी। इसके पीछे वह मुठभेड़ स्थल गांव से करीब 4 किलोमीटर दूर होने का तर्क देते हैं। सरेंडर पर फोकस – SP गरियाबंद एसपी निखिल राखेचा ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि नक्सली मूवमेंट को तेलुगू कैडर ड्राइव करता है। फोर्स ने दोनों तेलुगू लीडर को मार गिराया है। अब फोकस सरेंडर पर है। चलपति के मारे जाने के बाद बालकृष्णा को मिली थी जिम्मेदारी 14 जनवरी को चलपति समेत 16 नक्सलियों के ढेर होने के बाद धमतरी, गरियाबंद और नुआपड़ा डिवीजन कमेटी को विस्तार करने की जिम्मेदारी बालकृष्ण को दी गई थी। यह सूचना पुलिस तक आ चुकी थी। बालकृष्ण की मौजूदगी की पुख्ता सूचना के बाद एसपी निखिल राखेचा ने संयुक्त ऑपरेशन लॉन्च किया था। अब पढ़िए बालकृष्णा तक कैसे पहुंची पुलिस ? मोडेम 25 साल से सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बच रहा था। एजेंसियों के पास बालकृष्ण के जवानी की तस्वीर भर थी। 15 दिन पहले ही मोडेम बालकृष्ण के गार्ड कैलाश नाम के नक्सली ने सरेंडर किया था। उसी से कुख्यात नक्सली मोडेम के बारे में एजेंसी को कई पुख्ता जानकारियां मिलीं। पुलिस के मुताबिक मोडेम बालकृष्ण कई साल से शुगर की बीमारी से जूझ रहा था। उसके सिर के बाल झड़ गए हैं। उसे चलने के लिए 2 लाठियों का सहारा लेना पड़ता था। शाह की डेडलाइन, 2026 तक करेंगे नक्सलवाद का खात्मा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अगस्त 2024 और दिसंबर 2024 में छत्तीसगढ़ के रायपुर और जगदलपुर आए थे। वे यहां अलग-अलग कार्यक्रमों में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने अलग-अलग मंचों से नक्सलियों को चेताते हुए कहा था कि हथियार डाल दें। हिंसा करोगे तो हमारे जवान निपटेंगे। वहीं उन्होंने एक डेडलाइन भी जारी की थी कि 31 मार्च 2026 तक पूरे देश से नक्सलवाद का खात्मा कर दिया जाएगा। शाह के डेडलाइन जारी करने के बाद से बस्तर में नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन काफी तेज हो गए हैं। लगातार बड़े नक्सली लीडर मारे जा रहे ……………………………. इससे जुड़ी खबर भी पढ़ें… छत्तीसगढ़ में 5 करोड़ के इनामी समेत 12 नक्सली ढेर:बालाकृष्णन अकेले 2 करोड़ का इनामी, हेलीकॉप्टर से लाए गए 6 पुरुष,4 महिलाओं के शव छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में गुरुवार को जवानों ने एनकाउंटर में डेढ़ करोड़ के इनामी नक्सली मोडेम बालकृष्ण समेत 10 नक्सली को मार गिराया। सभी के शव हेलीकॉप्टर से गरियाबंद लाए गए हैं। मोडेम बालकृष्ण ओडिशा स्टेट कमेटी का सचिव था। मामला मैनपुर थाना क्षेत्र के मटाल पहाड़ी का है। पढ़ें पूरी खबर…

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