बाघिन का गलत इलाज चला:वनतारा के डॉक्टरों ने जांच की तो बीमारी पता लगी, तब तक देर हो गई

जंगल सफारी की बाघिन की मौत से वन्य प्राणियों के इलाज के सिस्टम की सच्चाई सामने आ गई है। सफारी में निर्धारित मापदंडों के अनुसार न डॉक्टर हैं न बेहतर इलाज का बेहतर सिस्टम। सोनोग्राफी मशीन है, लेकिन उसका तकनीशियन नहीं है। बाघिन की मौत की सबसे बड़ी वजह यही बनी। बाघिन बिजली पिछले करीब ढाई महीने से बीमार थी। तकनीशियन न होने से सोनोग्राफी नहीं हो सकी, इस वजह से बीमारी का सही पता नहीं चला और डॉक्टर अपने अनुभव से पायरो प्लाज्मोसिस बीमारी मानकर इलाज करते रहे। बाघिन के पायोमेट्रा यानी गर्भाशय में मवाद भर गया था। इसका पता गुजरात के वनतारा के डाक्टरों यहां पहुंचे और सोनोग्राफी की, तब चला, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। सही इलाज नहीं होने के कारण उसकी मौत हो गई। पड़ताल में सामने आया कि जंगल सफारी में डाक्टरों के 3 पद हैं, लेकिन सेवारत एक ही है। एक संविदा पर है, लेकिन वे अभी नहीं आ रहे हैं। बाघिन बिजली को फरवरी के बाद से तकलीफ हो रही थी। डॉक्टर को उसकी बीमारी का कुछ दिन बाद पता चला। उन्होंने ट्रीटमेंट किया। कुछ दिन ठीक रहने के बाद फिर बीमार पड़ने लगी। उसने धीरे-धीरे भोजन करना बंद ही कर दिया। उसके बाद बिलासपुर से पशु विशेषज्ञ को बुलाया गया। उन्होंने सेंट्रल जू अथॉरिटी से अनुमति लेकर उसे वनतारा भेजने का प्रस्ताव रखा। उसके बाद अफसरों ने वनतारा प्रबंधन से संपर्क किया। बाघिन की स्थिति की जानकारी लेने के बाद वनतारा विशेषज्ञ यहां पहुंचे। उन्होंने सोनोग्राफी की, तब पता चला कि उसके गर्भाशय में मवाद भर गया है। रायपुर में उसका इलाज संभव नहीं। उसके बाद ही बाघिन को बेहतर इलाज के लिए वनतारा ले जाने का निर्णय लिया गया। वहां पता चला कि उसकी किडनी भी फेल हो चुकी है। उसका क्रिएटिनिन भी काफी बढ़ गया था। तमाम दिक्कतों के बाद बाघिन ने आखिर दम तोड़ दिया। गुजरात रिसर्च इंस्टीट्यूट भेजी गई बाघिन की मौत जंगल सफारी से गुजरात स्थित वनतारा रिसर्च इंस्टीट्यूट भेजी गई बाघिन बिजली की मौत हो गई। उसे गंभीर स्थिति में 7 अक्टूबर को गुजरात जामनगर स्थित वनतारा ले जाया गया था। दो दिन गहन इलाज के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका। शुक्रवार की रात उसने दम तोड़ा। बाघिन बिजली ने फरवरी में 2 शावकों को जन्म दिया था। एक शावक मृत पैदा हुआ था। दूसरा भी बेहद कमजोर था। कुछ दिनों बाद उसकी भी मौत हो गई। बच्चों के जन्म के बाद से ही बाघिन को धीरे-धीरे पेट में तकलीफ शुरू हुई। यही उसके लिए जानलेवा साबित हुई। बिजली का जन्म 2017 में जंगल सफारी में हुआ था। जंगल सफारी में अब राज्य में 3 डॉक्टर संविदा पर, नियमित के 18 पद खाली: राज्य में वन्य प्राणियों के इलाज और उनकी देखरेख के लिए वैसे तो 6 नियमित और 15 संविदा डाक्टरों के पद हैं। लेकिन अभी 18 डाक्टरों का काम केवल 3 कर रहे हैं। 2020 तक संविदा के सभी पद भरे थे, लेकिन बाद में उनकी पीएससी के माध्यम से पशु विभाग में नियमित नियुक्ति हो गई और उन्होंने यहां से नौकरी छोड़ दी। तत्काल भर्ती करेंगे तकनीशियन: पांडे
पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ अरुण पांडे ने बताया कि सफारी वन्य प्राणियों के इलाज की स्थिति में सुधार के लिए प्रयास किए जाएंगे। बाघिन को बेहतर इलाज के लिए भेजा गया था। वहां पता चला कि गर्भाशय के साथ उसकी किडनी में संक्रमण बढ़ गया था। सफारी में तत्काल सोनोग्राफी तकनीशियन की भर्ती करेंगे।

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