अगले 5 दिन बरसात…8 जिलों में यलो अलर्ट:बस्तर से सरगुजा तक बरसेगा पानी, अन्य जिलों में बिजली गिरेगी, आंधी चलेगी; अब-तक 86% कोटा पूरा

पूरे छत्तीसगढ़ में अगले पांच दिनों तक तेज बारिश हो सकती है। मौसम विभाग ने बुधवार को कोरबा, सरगुजा, बलरामपुर, जशपुर, रायगढ़, बीजापुर, दंतेवाड़ा, बस्तर इन 8 जिलों में तेज बारिश का यलो अलर्ट है। वहीं अन्य जिलों में गरज चमक के साथ बिजली गिर सकती है, आंधी चल सकती है। पिछले 24 घंटे की बात करें तो सरगुजा संभाग के एक दो जगहों पर भारी बारिश हुई है। वहीं अन्य संभागों में हल्की बारिश हुई है। ओवल ऑल बात करें तो 8 सितंबर तक प्रदेश में मानसून का 86.9% प्रतिशत कोटा पूरा हो चुका है। सामान्य तौर पर औसत 1143.3 मिमी बारिश होती है, जबकि अब तक 994 मिमी वर्षा हो चुकी है। इस साल मानसून अगस्त के महीने को छोड़ दें तो अब तक सामान्य रहा है। बलरामपुर में सबसे ज्यादा पानी बरसा प्रदेश में अब तक 994MM बारिश हुई है। बेमेतरा जिले में अब तक 472 मिमी पानी बरसा है, जो सामान्य से 49% कम है। अन्य जिलों जैसे बस्तर, बेमेतरा, जगदलपुर में वर्षा सामान्य के आसपास हुई है। वहीं, बलरामपुर जिले में 1344.5 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 54 अधिक है। आंकड़े 1 जून से 9 सितंबर 2025 तक के हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में दिक्कत अभी बरकरार पिछले हफ्ते उत्तरी और दक्षिणी छत्तीसगढ़ में भारी बारिश हुई। बस्तर संभाग के 4 जिलों में कई पुल टूट गए, 200 से ज्यादा घर ढह गए। नदियां-नाले उफान पर आ गए और बाढ़ जैसे हालात बन गए। प्रशासन को राहत और बचाव कार्य चलाना पड़ा। प्रभावितों को राहत शिविर में रखा गया है। फिलहाल स्थिति सामान्य की ओर बढ़ रही है, लेकिन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में दिक्कतें अब भी बरकरार हैं। बलरामपुर में बांध फूटने से 6 लोगों की मौत इसके अलावा बलरामपुर में बांध फूटने की घटना में अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है। 6 लोगों के शव मिल चुके हैं। 1 लापता बच्ची की तलाश जारी है। बता दें कि लगातार बारिश से लबालब बांध बह गया था। जिसकी चपेट में आकर निचले इलाके के 4 घर बह गए थे। बस्तर में 200 से ज्यादा घर ढहे बस्तर संभाग में पिछले दिनों हुई मूसलाधार बारिश के बाद चार जिलों दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा और बस्तर में बाढ़ से 200 से ज्यादा मकान ढह गए। 2196 लोग राहत शिविर में शिफ्ट किए गए। इन्हें स्कूल, इंडोर स्टेडियम, आश्रम जैसे जगहों पर ठहराया गया है। अब तक 5 लोगों की मौत हो चुकी है। अब बाढ़ के बाद की तस्वीरें भी सामने आई हैं। बारसूर में स्टेट हाईवे 5 पर पुल टूट गया, टूटे पुल पर अब सीढ़ी बांधकर ग्रामीण आना जाना कर रहे हैं। बता दें कि नारायणपुर, बस्तर, बीजापुर के 55 से 60 गांवों के ग्रामीण अपनी रोजमर्रा के सामानों के लिए बारसूर साप्ताहिक बाजार पहुंचते हैं। दरअसल, आसमान में विपरीत एनर्जी के बादल हवा से उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं। ये विपरीत दिशा में जाते हुए आपस में टकराते हैं। इससे होने वाले घर्षण से बिजली पैदा होती है और वह धरती पर गिरती है। आकाशीय बिजली पृथ्वी पर पहुंचने के बाद ऐसे माध्यम को तलाशती है जहां से वह गुजर सके। अगर यह आकाशीय बिजली, बिजली के खंभों के संपर्क में आती है तो वह उसके लिए कंडक्टर (संचालक) का काम करता है, लेकिन उस समय कोई व्यक्ति इसकी परिधि में आ जाता है तो वह उस चार्ज के लिए सबसे बढ़िया कंडक्टर का काम करता है। जयपुर में आमेर महल के वॉच टावर पर हुए हादसे में भी कुछ ऐसा ही हुआ। आकाशीय बिजली से जुड़े कुछ तथ्य जो आपके लिए जानना जरूरी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *